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भ्रष्ट इंजीनियरों पर कार्रवाई में सरकारी भेदभाव!

बांध बनाने वाले जल संसाधन विभाग के 8 इंजीनियर निलंबित

सड़क, पुल, अस्पताल बनाने वाले पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को गुपगुप नोटिस की खानापूर्ति

भोपाल। मप्र सरकार ने 10 दिन बाद कारम बांध फूटने के मामले में जल संसाधन विभाग के 8 इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जबकि सरकार सड़क, पुल और भवन निर्माण में घनघोर लापरवाही करने वालों पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों पर मेहरबान बनी है। लोक निर्माण विभाग ने जांच के बाद लापरवाही करने वाले इंजीनियरों को सिर्फ चोरी-छिपे आरोप पत्र भेजने की खानापूर्ति की है। जबकि इंजीनियरों ने मिलीभगत से भवन, सड़क और पुल निर्माण में करोड़ों की हेराफेरी की है। ऐसे में निर्माण में अनियमितता के मामले में जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों को निलंबित करने और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों पर कार्रवाई नहीं होने पर सरकारी भेदभाव सामने आया है। खास बात यह है कि लोक निर्माण विभाग ने आरोपी इंजीनियरों को मलाईदार पद दे रखा है।
ग्वालियर में निर्माणधीन 1000 बेड के अस्पताल निर्माण से जुड़े पीडब्ल्यूडी पीआईयू के अफसरों ने जमकर माल कूटा है। अस्पताल निर्माण से जुड़े इंजीनियर इतने ताकतवर हैं कि उन्होंने बिना सरकार की अनुमति के अपने स्तर से अस्तपाल की मूल डिजाइन को बदलकर 7 मंदिर से 9 मंजिल कर दिया। इससे सरकार पर करीब 60 करोड़ से ज्यादा का वित्तीय भार आया। साथ ही पूराने भवन को गिराने से लेकर मलबा बेचने और नए भवन में इंटीनियर के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की है। पीआईयू ग्वालियर के मौजूदा अतिरिक्त परियोजना संचालक वीके आरख ने अपनी जांच में अस्पताल निर्माण से जुड़े 9 इंजीनियरों को आरोपी बनाने की सिफारिश की है। जिसमें भोपाल संभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के भी शामिल हैं। खास बात यह है कि विभाग ने वीके आरख की रिपोर्ट के आधार पर 9 इंजीनियरों को गुपचुप तरीके से आरोप पत्र भेज दिए हैं। जबकि इनमें से सिर्फ एक इंजीनियर प्रदीप अष्टपुत्रे को निलंबित किया है। अन्य इंजीनियरों को मलाईदार पोस्टिंग दे रखी है।

घनघोर लारवाही का आरोप, फिर भी हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट के प्रभारी
ग्वालियर के 1000 बेड का अस्पताल निर्माण में वित्तीय अनियमितता के चलते राज्य शासन ने 3 महीने पहले भोपाल संभाग के मुख्य अभियंता संजय मस्के को आरोप पत्र थमाया था। सरकार को अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। संजय मस्के पर विभाग इस तरह से मेहरबान है कि घनघोर वित्तीय अनियमितता के आरोप होने के बावजूद भी उन्हें हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट वाले सीपीए (राजधानी परियोजना प्रशासन) का प्रभारी भी बना दिया है। भोपाल में सड़कों का जाल बिछाने के नाम पर हर साल करोड़ों का भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। गंभीर आरोप होने के बाद भी सरकार ने मस्के को मुख्य अभियंता भोपाल से हटाया तक नहीं है। इसी तरह ग्वालियर के अतिरिक्त परियोजना संचालक वीके आरख को भोपाल में पुल निर्माण में 5 करोड़ का अतिरिक्ति भुगतान करने के मामले में आरोप पत्र थमाया है। शासन को आरख का जवाब नहीं मिला है। इसके बावजूद भी आरख को ग्वालियर पीआईयू का मुखिया बना दिया है।
वीके की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सरकार ने 1000 बेड के अस्तपाल के मामले में भोपाल के मुख्य अभियंता संजय मस्के समेत 9 लोगों को आरोप पत्र थमाए हैं। कांग्रेस शासन काल में आरख भोपाल में मुख्य अभियंता थे।
इन पर भी आरोप, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं
सरकार ने ग्वालियर अस्पताल मामले में बीसी टेंटवाल तत्कालीन प्रभारी अतिरिक्त परियोजना संचालक पीआईयू ग्वालियर(वर्तमान ग्वालियर। प्रदीप अष्टपुत्रे (निलंबित)प्रभारी संभागीय परियोजना यंत्री ग्वालियर। धर्मेन्द्र यादव तत्कालीन प्रभारी संभागीय परियोजना यंत्री दतिया (वर्तमान शिवपुरी), एनएस धाकड़ तत्कालीन प्रभारी परियोजना यंत्री (वर्तमान शिवपुरी), पीएन रायपुरिया तत्कालीन प्रभारी परियोजना यंत्री (वर्तमान पीआईयू जबलपुर) , प्रवीण नामदेव सहायक परियोजना यंत्री पीआईयू ग्वायिलर, उमेश गोयल तत्कालीन सहायो परियोजना यंत्री (वर्तमान पीडब्ल्यूडी ग्वालियर), एनएस पचौधरी सहायक परियोजना यंत्री पीआईयू ग्वालियर को भी आरोप पत्र भेजा है। लेकिन इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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प्रोग्रेस ऑफ़ इंडिया न्यूज

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