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मध्यप्रदेश में साइबर तहसील की शुरुआत से अब 15 दिन में मिलेगा नामांतरण, ई-मेल से मिलेगी आदेश की कॉपी

From the beginning of Cyber Tehsil in Madhya Pradesh, name transfer will be available within 15 days, copy of order will be received through e-mail.

सीहोर। प्रशासन सुधार में साइबर तहसील व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों के हित में अभूतपूर्व परिवर्तन होने जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ साइबर तहसील का शुभारंभ हुआ है। अब प्रदेश में राजस्व प्रकरणों का निराकरण अत्यंत कम समय में हो जाएगा। भू अभिलेखों में अमल के बाद भू अभिलेखों एवं आदेश की सत्यापित प्रतिलिपि संबंधित पक्षकार को मिल सकेगी।
अब अनावश्यक रूप से लंबित रहने वाले प्रकरणों का तकनीकी सहायता से कम समय में गुणवत्तापूर्ण निराकरण हो सकेगा। साइबर तहसीलों में औसत 15 से 17 दिनों का समय लग रहा है, जो मैन्युअल प्रक्रिया में लगने वाले 60 दिनों की तुलना में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
15 दिन की समय सीमा, पेपरलेस और ऑनलाइन नामांतरण तथा भू अभिलेख अद्यतन करने के लिए साइबर तहसील स्थापित की गई है। इस प्रकार संपूर्ण खसरा के क्रय विक्रय से संबंधित नामांतरण प्रकरणों का निराकरण साइबर तहसीलों से किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रकरणों में त्वरित नामांतरण के अलावा भू-अभिलेख अपडेट होगा। तहसील स्तर पर अविवादित प्रकरणों के निराकरण का भार कम होगा।
इस प्रणाली से रियल टाइम में भू अभिलेख अपडेट किए जाने की अनूठी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे पटवारी का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। पटवारी रिपोर्ट आ/नलाइन जमा करने की सुविधा है। कम से कम समय में निराकरण होगा। पहले इन प्रक्रियाओं में औसत 60 दिन लग जाते थे। साइबर तहसील में औसत 15 दिनों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। साइबर तहसील द्वारा पारित आदेश की पीडीएफ प्रति आवेदक को ईमेल वाट्सएप से मिल जाएगी। इसकी प्रति आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज की जाएगी।
साइबर तहसील में पंजीयन से नामांतरण तक की प्रकिया लागू कर दी गई है। साइबर तहसील को 4 अलग-अलग प्लेटफार्मों जैसे संपदा पोर्टल, भूलेख पोर्टल, राजस्व प्रकरण प्रबंधन व्यवस्था के पोर्टल से जोड़ दिया गया है। संपूर्ण खसरा, जिसे विभाजित नहीं किया गया एवं ऐसी जमीन जो किसी प्रकार से गिरवी या बंधक न रखी गई हो। पोर्टल पर पंजीयन करने के बाद और रजिस्ट्री के बाद रेवेन्यू पोर्टल पर स्वतः केस दर्ज हो जाएगा। इसके बाद सायबर तहसीलदार द्वारा जांच की जाएगी। सूचना के बाद इश्तेहार एवं पटवारी रिपोर्ट के लिए मेमो जारी किया जाएगा। इसके बाद आदेश पारित कर भूअभिलेख को अपडेट किया जाएगा। दस दिन बाद दावा आपत्ति प्राप्त नहीं होने पर ई मेल एवं वाट्सअप से आदेश दिए जाएंगे।
बताया गया कि रजिस्ट्री के बाद बिना आवेदन किए नानांतरण का प्रखंड दर्ज हो जाता है। इस प्रक्रिया में क्रेता और विक्रेता को नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में उपस्थित होने, पेशी पर आने की जरूरत नहीं है। संपूर्ण प्रक्रिया आनलाइन है। नोटिस क्रेता विक्रेता तथा ग्राम के सभी निवासियों को एसएमएस से मिलता है। नोटिस आरसीएमएस पोर्टल पर भी दिखता है। इसमें आनलाइन आपत्ति दर्ज की जा सकती है। अंतिम आदेश की कापी ईमेल या व्हाट्सएप के माध्यम से आवेदक को मिलेगी। आदेश पारित होते ही स्वतः भू.अभिलेखों में सुधार हो जाता है। आदेश एवं राजस्व अभिलेखों में अमल की प्रक्रिया अवकाश को छोड़कर 15 दिनों में पूरी हो जाएगी।

 

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