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2023 चुनावी साल घोषणाओं की अपार बौछार:संपादक की कलम से

प्रोग्रेस ऑफ इंडिया न्यूज

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5/2/2023: 2023 चुनावी साल घोषणाओं की अपार बौछार हर दल हर प्रतिनिधि जनता को ठगने की कला में माहिर जनता का दुर्भाग्य है हर 5 साल में उस को ठगा जाता है ठगने वालों की अपार भीड़ एक जनप्रतिनिधि के नाते आता है। और जनता को तरह-तरह के बड़े सपने दिखाता है और कहता है जो कहोगे मैं सब कुछ कर दूंगा इसी आशाओं के साथ जनता भी ईश्वर का प्रतिमान कर हमारे भाग्य के दरवाजे खुल गए हमारी मनोकामना है ईश्वर ने सुन ली जनप्रतिनिधि को अपना किस्मत का प्रतिनिधि मानकर उनके समर्थन में आवाज सारे समाज परिवार सारा ग्राम सारा शहर हर कोई के लिए तन मन धन से संपूर्ण भाव से लग जाता है

हर तरफ भुखमरी बेरोजगारी महंगाई की बात चुनावी साल में करता है 5 साल तक जनता का शोषण , जनता का अधिकार सब कुछ सत्ता के हवाले हो जाता है तब किसी की आवाज क्यों नहीं गूँजती , पंचवर्षीय योजना में सारे प्रतिनिधि अपने काम धंधे में लग जाते हैं सरकार की दलाली चापलूसी मैं आम आदमी को वही मेहनत वही मजदूरी और पंचवर्षीय योजना में सत्ता को घोषणा उसके अधिकार में रह जाता है ।
हर पार्टी जनता के चौखट पर दस्तक कर रहा है अपने लुभावनी योजनाओं से ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है , जो सत्ताधारी दल है वह अपनी पंचवर्षीय योजना का बखान करते जा रहा है । हकीकत जमीन की कोई नहीं सुनता बस अपने जुमले तैयार कर जनता को सुनाने जाता है, तालियां बजाता है हमने आपके साथ अच्छा काम किया हमने विकास किया , विकास के पीछे नहीं बताता कि सरकार की योजनाओं में हम कितना कमीशन खाया।

हमने अपना कितना विकास किया और आगे कितना हम अपना विकास करेंगे ,अरे पागलों सावधान हो जाओ इन चुनावी अखाड़ों से जो आए पहले उसका हिसाब पूछो उसकी कुंडली में देखो कल कितना तुम्हारे पास था आज कितने अमीर हो गए, कहां से पैसा आया तुम्हारे पास यह भी आपको ही हिसाब लेना है 5 साल में आपके पास मौका आया है मौका आया है किसी को मत छोड़ना अपना हिसाब चुकता जरूर कर लेना ,फिर नया चोर चुन लेना उसका हिसाब फिर से 5 साल …

हमारे देश में ऐसी व्यवस्था है आप जहां से भी कहीं से भी धन कमाओ भ्रष्टाचार करो और सुखी जीवन जिओ सुविधा वन बनो अपनी जय-जय कराओ और देश में दो ही लोगों के मजे हैं सत्ता के रखवाले या नौकरशाही उनका हिसाब कोई नहीं पूछता है ।

कहां से कमाया कहां से लाया अपने महीने की तनख्वाह में उसने कभी देखा ही नहीं भ्रष्टाचार के पैसों से खाया पिया बच्चों को पढ़ाया और अपने महल को स्वर्ग जैसे बनाया।
: हमने स्वतंत्र भारत में एक सपना देखा था हर निचले स्तर का व्यक्ति और ऊंचे दर्जे का व्यक्ति को बराबर सुविधाएं और जीने का हक मिलेगा पर वही राजा रजवाड़ों की सोच गुलामी की जंजीर में आज भी हर निचले स्तर का व्यक्ति जकड़ा है बदल डालो इस समाज को बदल डालो इस ऊंच-नीच के भेदभाव को दिला दो सबको समानता का अधिकार यही मौलिक अधिकार , जय हिंद जय भारत
प्रोग्रेस आफ इंडिया न्यूज़ के संपादक पंडित राम प्रकाश त्रिपाठी की कलम से प्रकाशित पढ़ते रहिए प्रोग्रेस आफ इंडिया न्यूज़
हर रविवार को संपादक के कलम से लिखा जरूर पढ़िए

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