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मार्केट में एनबीएफसी पर आरबीआई के रुख से बढ़ सकता है उतार-चढ़ाव

Market volatility may increase due to RBI's stance on NBFCs

फिच रेटिंग्स का मानना है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों में कॉरपोरेट गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने के भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया प्रयास सफल होने पर लंबी अवधि में उद्योग के जोखिम को कम कर सकते हैं, लेकिन इससे प्रभावित गैर-बैंकिंग इकाइयों के लिए निकट अवधि में व्यापार में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि हाल के दिनों में गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों के संबंध में आरबीआई की ओर से दी गई सलाह ने इस क्षेत्र में अनुपालन से जुड़ी कमियों को उजागर किया है।
आरबीआई ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि एनबीएफआई को 20,000 रुपये से कम के नकद ऋण के वितरण पर मौजूदा नियामकीय सीमाओं का पालन करना चाहिए।
फिच ने कहा कि भारत में गोल्ड लोन अक्सर नकद में दिया जाता है, क्योंकि यह कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी उधारकर्ताओं के लिए ऋण का स्रोत है। फिच की रेटिंग वाले गोल्ड लोन प्रदाताओं के लिए औसत ऋण का आकार 50,000 रुपये से 80,000 रुपये के बीच है, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा, परामर्श जारी किए जाने से नकद में दिया जाता रहा है।

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