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अब तो करो बस, नुकसान की हो रही हद|

Now just do it, the damage is becoming too much.

पर्यावरण की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। मानव द्वारा ही सबसे अधिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जाता है। इस पर हमें मंथन करने की जरूरत है। ऐसे कदम उठाएं जाएं जिससे पर्यावरण की रक्षा हो। जल कभी व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए। जैसे घर के आंगन धोने के बजाए पोंछा लगाकर हम जल बचा सकते हैं। प्रदूषण का सबसे मुख्य कारण वाहनों का धुंए, तेल, कोयला जैसे ईंधन जलने से निकले पदार्थ, कारखाने व इंडस्ट्रीज़ से निकला कचरा, जंगलों की आग, प्लास्टिक कचरा, बढ़़ते शहरीकरण, केमिकल खाद व कीटनाशक, घटते जंगल, खनन आदि शामिल हैं।
हम प्रतिदिन धड़ल्ले से वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। प्रकृति की रक्षा को लेकर हम सभी को समर्पित रहना चाहिए। इसके अलावा हमें कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे प्रकृति को लाभ हो। उदाहरण के लिए अपने घर आंगन में थोड़ी सी जगह पेड़ पौधों के लिए रखें। ये हरियाली देंगे, तापमान कम करेंगे, पानी का प्रबंधन करेंगे व सुकून से जीवन में सुख व प्रसन्नता का एहसास कराएंगे। पानी का संरक्षण करें, हर बूंद को बचाएं। ब्रश करते समय नल खुला न छोड़ें। शावर की जगह बाल्टी में पानी लेकर नहाएं।
गाड़ियां धोने की बजाए बाल्टी में पानी लेकर कपड़े से साफ करें। प्रतिदिन फर्श साफ करने के बाद पोछा का पानी गमलों व पौधों में डालें। (फिनाइल रहित पानी लें)। दाल, सब्जी, चावल धोने के बाद इकट्ठा कर पानी गमलों व क्यारियों में डालें। सार्वजनिक नलों को बहते देखें तो नल बंद करने की जहमियत उठाएं। बाल्टी में गाय, बकरी, कुत्ते आदि के लिए व चकोरों में और पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम करें। गाय, कुत्ते को रोटी दें पर पालीथीन समेत खाना न फेंके, ऐसा करने से उनकी जान जा सकती है। प्राणिमात्र पर दया का भाव दिखाएं। घर का कचरा सब्जी, फल, अनाज को पशुओं को खिलाएं। अन्न का दुरुपयोग न करें। बचा खाना खराब होने से पहले गरीबों में बांटे। पर्यावरण मित्र

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