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गर्मी के दिनों में ग्रीन नेट पौधों के लिए बन रही संजीवनी

Green net is becoming a lifeline for plants during summer.

बिलासपुर | गर्मी अपने चरम पर आ चुका है। तेज धूप की तपन तो अब मनुष्य नहीं सह पा रहा है. ऐसी स्थिति में दो मिनट भी धूप में खड़ा होना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। ऐसे झुलसा देने वाले तेज धूप में छोटे पौधों को सीधे धूप सहना पड़ता है। इसका खामियाजा भी इन पौधों को सहना पड़ता है। सूरत की तेज किरण पानी को सोख लेता है, जिससे पौधे मुरझा जाते हैं। यदि इस समय इनकी देखभाल नहीं किया जाता है और इन्हें पानी नहीं मिलता है तो पौधे मर भी जाते है, लेकिन अब इस धूप से इन पौधों को बचाने के लिए ग्रीन नेट का विकल्प आ चुका है। जिसे घर के टेरिस के गार्डन में लगा देने से पौधे तेज धूप में छाया में रहते हैं और अच्छे से फलते-फूलते है।

सूरज की तीखे किरणें तेज धूप के रूप में सुबह से ही अपने तेवर दिखाने लगे है। मौजूदा स्थिति में पारा 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को भी पार करने की संभावना है। तेज धूप का असर हर तरफ देखने को मिल रहा है। लोगों से लेकर जानवर तक सभी इससे प्रभावित हो रहे है।

जो तेज धूप से बचने के लिए छाया में आ जाते है, लेकिन इन सब से विपरीत पौधों को पूरे समय तेज धूप सहना पड़ता है और ये पौधे छाया की तलाश भी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में घंटों तेज धूप में रहने की वजह से सूरज की तेज किरण पौधे का पूरा पानी सोख लेता है। इस तरह देखते ही देखते कुछ ही घंटे में पौधे मुरझा जाते है। रोजाना सीधे धूप झेलने की वजह से पौधे पूरी तरह से सूख जाते है और फिर से इसमे हरियाल आना संभव नहीं हो पाता है।

लेकिन इस तरह के पौधों को बचाने के लिए और छाया देने के लिए ग्रीन नेट आ चुका है। जिसका चलन धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। अब घरों के आंगन में बने गार्डन के साथ ही टेरिस गार्डन में ऐसे बड़े-बड़े ग्रीन नेट दिखने लगे है। ग्रीन नेट लगने के बाद धूप पौधों में छनकर पहुंचती है और इससे उनमें आवश्यक छाया भी बनी रहती है। इसके साथ ही पौधों को गर्मी में भी पनपने के लिए सही वातावरण मिलता है और भीषण गर्मी में भी ये पौधे खूब फलने-फूलने लगते है।

ग्रीन नेट का एक बड़ा फायदा यह है कि इसे लगाने से जितने स्थान पर उसकी छाया पहुंचती हैं वहां का तापमान कम से कम पांच डिग्री तक कम हो जाता है। जो इस भीषण गर्मी में राहत देता है। साफ है कि यह पौधों के लिए संजीवनी साबित होती है, क्योंकि यह पानी के रूप में पड़ी नमी को भी सोखने नहीं देता है और इस नमी को पानी के रूप में पौधे लेते है और तेज गति से विकसित होते है।

जिन घरों में गार्डन या ज्यादा पौधे नहीं है, फिर भी वे ग्रीन नेट का सहारा लेते हैं। खासतौर से ऐसे घर जहां पर दिनभर सीधे धूप पड़ता है, उनके घर के अंदर का तापमान बढ़ जाता है। ऐसे स्थिति में ग्रीन नेट लगाने पर तापमान में कमी आ जाती है और रहवासियों को राहत मिलता है।

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